सोमवार, जून 22, 2009

स्वपन

रोज एक स्वपन देखूंगा
यह वादा है अपने आपसे ,
आज सुबह -सुबह एक ऐसा ,
स्वपन देखा ,जो बिल्कुल ,
स्वपन सा झूठा लगता है ,
अब मन को समझाता हूँ ,
यह स्वपन की सोच झूठी है ,
इसके सहारे खडे रहोगे ,
तो अधूरे रह जाओगे ,
एक भिखारी की तरह ,
सिग्नल पर कटोरा लिए खडे मिलोगे ,
फ़िर सोचोगे ,स्वपन में कितनी सच्चाई है ,
चलो , सच्चा स्वपन देखने के लिए ,
एक नाटक करें ................

4 टिप्‍पणियां:

AlbelaKhatri.com ने कहा…

achha laga !
vaakai bahut achha laga !
badhaai !

ओम आर्य ने कहा…

$$bahut hi achchha laga ............sachmuch gahare uatari aapki rachna$

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत बढ़िया.

अल्पना वर्मा ने कहा…

kavita mein gahari soch hai--sapno ke sahare kahan jeevan katTa hai..