शुक्रवार, जुलाई 10, 2009

हमदर्दी

आँख दिखाने का रोग हो गया उसे ,
बहुतों को दिखाया ,इलाज कोई नही मिला उसे ,
अब वो ,आखों पे काला चस्मा चड़ा के घूमता सड़कों पे ,
एक दिन पुलिस ने उसे ,सीना -जोरी के इल्जाम में ,
पकड़ लिया ....दुसरे दिन अदालत में पेश किया गया ,
कटघरे में खडा -एक गुनाह गार की तरह ,
वकील ने जिरह करना शुरू किया ,
जज ने मुझे देखा जब ,
आखें उसकी उससे मिली
मुझे पहचान कर ,ख़ुद ही बोल पडा ,
मैं इसको जनता हूँ -यह गुनाहगार कब बन गया ,
यह तो मेरा दोस्त - अरमान है ,
इसकी इस बीमारी से मै वाकिफ हूँ ,
इलाज भी मेरे पास है ,इसे सजा नही ,
एक प्यार की जरुरत है ,
जो इसकी आखों में झांक कर ,
इसके दुःख को पढ़ ले ,हमदर्दी का मलहम लगा दे ,
फ़िर आखं दिखाना छोड़ देगा .......

कोई टिप्पणी नहीं: