गुरुवार, सितंबर 24, 2009

रिपीट कहानी

बेटा मेरा - मेरी ही पकड से ,
पार हो गया ......... ,
अब वो झूठ बोलता है ...,
मुझ से ।
अपनी गर्ल फ्रेंड से .....,
घर बसाने की बातें करता ॥,
कल्पनाओं में दोनों उड़ते हैं ।
मैं अपने ही खून से ....,
दूर -दूर होने लगा ॥ ।
कल तक जो मेरा था ,
अब किसी और का होता जा रहा ....,
पहले अपनी .......... ,
तकलीफों को सेयर करता था ॥,।
अब सब कुछ छिपाने लगा .....,।
फ़िर मुझे वो दिन याद आए ... ।
जब मैं अपनी पत्नी के साथ ...,
इस शहर में आगया था ... ,
फ़िर ......वही हुआ ॥
जो मेरा बेटा ...आज कर रहा है ,
वही कहानी फ़िर से रिपीट हो रही है ,
...वह भी दुखी थे ...मैं भी दुखी हूँ ॥,
कल को मेरा बेटा भी दुखी हो गा ॥
सब बहने दो ..बस देखते रहो ...?

3 टिप्‍पणियां:

safat alam ने कहा…

आप की रचनाएं अच्छी हैं पर शब्द कट कट कर आ रहे हैं क्यों ?

भंगार ने कहा…

शब्द कटने की बात समझ में नहीं
आ रही है ,फिर भी जानने की कोशिश
करूंगा ,

भंगार ने कहा…

शब्द कटने की बात समझ में नहीं
आ रही है ,फिर भी जानने की कोशिश
करूंगा ,