बुधवार, अक्तूबर 28, 2009

९१ कोजी होम

लिबास फ़िल्म की शूटिंग जुहू में एक फ्लैट में शुरू हुई ,
पहला दिन था .....फ्लैट को आर्ट डिरेक्टर अजीत बनर्जी
ने सजाया था ....यह फ्लैट गुलज़ार साहब के दोस्त राही
साहब का था ......नार्मल सिफ्ट थी ..मैं मुख्य सहायक था
मैं सेट पे नव बजे पहुँच गया .......आज सेट पे सिर्फ़ शबाना आजमी
थी ......थोडी देर में गुलज़ार साहब भी आ गए ..सेट को देखा
घर की सजावट को देखा ...थोडी देर में शबाना जी भी आ गयीं
इनको घर की सजावट पसंद नही आया ...उनका किरदार एक पत्नी
का था जो स्टेज ऐक्टर नसीर की पत्नी थी .....शूटिंग नही हुई
घर को शबाना जी के हिसाब से सजाया गया ....
निर्माता विकास मोहन जी थे ......एक दिन शूटिंग का न होना
उस वक्त के हिसाब से बीस हजार का नुकशान .......
दुसरे दिन से शूटिंग शुरू हुई ........उस वक्त गुलज़ार साहब अपने आप में
एक टॉप के निर्देशक में थे ....हर कलाकार उनके साथ काम करना चाहता था
इस फ़िल्म में नसीर के साथ राज ब्बर जी भी थे .........सभी नए थे
गुलज़ार साहब के साथ बहुत जायदा हिले मिले नही थे ......राज जी ने खुल कर
कह दिया ....यार गुलज़ार साहब के साथ मेरी हिम्मत नही होती ..बात करने की
तू मुझे सीन बता दिया कर .......
धीरे -धीरे गुलज़ार साहब को इस बात का एहसास हुआ ...फ़िर उन्होंने
कुछ एसा किया .....की सभी दोस्त हो गए ..और फ़िर जो सेट पे मस्ती होने लगी
पूछिये मत .......इसी दौर में मैं राज जी के कुछ करीब हुआ ......इसी पहचान ने
आज की जिन्दगी में बडी सहायता की ......जिसका एहसान मैं सारी जिन्दगी नही

bhuul सकता ......आज भी जब मिलता हूँ वही राज जी हैं .जो सन ८३ में थे

और कलाकार तो पहचानते ही नही .....कमाल है इंसान की फितरत ....

3 टिप्‍पणियां:

अजय कुमार ने कहा…

पढने में मजा आया , लिखते रहिये ,आता रहूँगा

नीरज गोस्वामी ने कहा…

बहुत रोचक लगते हैं आपके ये पुराने किस्से...लिखते रहिये...
नीरज

vimal verma ने कहा…

अच्छा है सरजी,आप लिखते रहें आपके संस्मरण को पढ़कर मज़ा आता है....शुक्रिया