गुरुवार, अक्तूबर 29, 2009

९१ कोजी होम

लिबास फ़िल्म को बनते हुए ,बहुत वक्त लग गया ....किसी वजह से फ़िल्म अभी तक रिलीज भी
नही हुई ....पर इस फ़िल्म के साथ बहुत ढेर सारी यादें जरुर हैं .....यह वह दौर था ...जब धन की बहुत
कमी थी ...पूरी फैमली थी ....दो बेटे एक बेटी ,सब की पढाई -लिखाई थी ...पर पैसा कहीं से नही मिलता था
यहाँ तक लिबास के निर्माता विकाश मोहन जिनकों हर महीने मुझे सैलेरी देनी होती थी .....वह भी नही देते थे
माँ को जब मेरे इस हालत के बारे में मालूम हुआ ...तो उन्होंने मुझे तीस हजार रूपये भेजे ,उस वक्त
इतने पैसे बहुत होते थे ......मैंने सोचा इन पैसों से मैं कोई बिजनेस कर लेता हूँ .....पर एक डर साथ लग जाता था
लखनऊ से यहाँ किस लिए आए हो .....बहुत सोच -समझ के बाद मैंने वी.यच .यस .कैमरा खरीद लिया ...उस वक्त सन
८३ में बतीस हजार का मिला था .....इस कैमरे से मेरा घर चलने लगा ...बच्चों को दूध मिलने लगा ...कई दोस्त थे
जो मुझे तो नहीं .....पर औरों को कहते थे .....शादिओं की शूटिग करने लगा .....मैं सुन कर तिलमिला जाता था । मैं ही था
जो इन लोगों के काम आता था ।
समय के साथ चीजें बदलने लगी ...,मैं पैसे वाला हो गया ....पर गुलज़ार साहब का साथ नहीं छोड़ा ...अँगूर ...
फ़िल्म की शूटिग शुरू हो गई ...मैं ही मुख्य सहायक था .....यह फ़िल्म साल भर में पूरी हो गई ....

इसी फ़िल्म की एक घटना है .....फ़िल्म की डबिंग चल रही थी ....संजीव कुमार जी डबिग कर रहे थे ..मुझसे
बहुत अच्छे रिश्ते थे .....फ़िल्म में एक जगह पर कुछ संवाद बढाना था .......हरी भाई वो चेंज नही करना चाहते थे ...जब मैंने
दो तीन बार कहा तो नराज़ हो गए ....और डबिंग छोड़ कर चले गए ....और कहते गए अगर रामलाल आएगा तो मैं डबिंग नहीं
करूँगा ....जाने -माने रिकार्डिस्ट इसा बाबा सूरत वाला से भी कहा ....मेरी हालत ख़राब ...मैंने गुलज़ार साहब से सारी बात बता दी

कल सुबह गुलज़ार साहब अजंता आर्ट्स डबिंग में आ कर बैठ गए ......और वहीं से हरी भाई को फोन किया ......

क्रमश .....

4 टिप्‍पणियां:

Pandit Kishore Ji ने कहा…

achhe sansmaran hain
jyotishkishore.blogspot.com

ओम आर्य ने कहा…

आपके संसमरण पढकर मै अपने आप को गुलजार जी के बहुत करीब पाता हूँ .........आपको पढना एक सुखद एहसास है मेरे लिये..........ओम

Udan Tashtari ने कहा…

अच्छा लगा यह संस्मरण पढ़कर भी.

sada ने कहा…

बहुत ही अच्‍छी प्रस्‍तुति ।