बुधवार, जनवरी 19, 2011

प्याज

फिर मुझ से बात करने लगे वो

वगैर बात के झगडा करते वो

ताने कसते मेरे पिता को

नहीं सिखाया माँ ने मुझे कुछ

ना ही धन दिया तुम्हारे पिता ने

इस महंगाई में खुद क़ा पेट पालना मुश्किल

बीवी मिल गयी तो ...महंगाई और बढ़ गयी

रात का आखरी पहर था

नींद आँखों से उड़ चुकी थी

मुझे जीने क़ा एक रास्ता मिला

मैंने एक प्याज व्यापारी से निकाह कर लिया

2 टिप्‍पणियां:

Syed Asad Hasan ने कहा…

कुछ गुलज़ार साहब और पंचम डा के रिश्ते के बारे में भी बताएं

ZEAL ने कहा…

A wise decision indeed.