बरसों पहले एक सोच को लिखा था ,
जो आज तक मेरे ख्यालों में पडी है ,
सिकुडी -मुडी पडी ,मुझे देखती रहती है ,
कभी -कभी आखें तरेर के कहती ,
मुझे किसी हाट में क्यूँ नही ले जाते ?
मैं भी बिकना चाहती हूँ ,
किसी के बेड -रूम में जीना चाहती हूँ ,
मैं कम अक्ल समझ के उसको ....,
उसकी बातें अनसुनी कर देता हूँ ,
आज वो जवान हो गयी ,
बहुत खूबसूरत उसके अल्फाज हैं ,
मीटर भी बहुत बैठा हुआ ,
तबले की धाप पे -- वो जग जाती ,
मुझे घूरती - और नाचने लगती ,
मुझे शर्म -सार कर के ,
एक दिन किसी के साथ भाग गयी ,
सुना है .....दिल्ली के किसी गलियारे की नूर है ,
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मंगलवार, सितंबर 22, 2009
गुरुवार, सितंबर 17, 2009
औलाद
बे -औलाद हूँ मैं ,चाह एक बेटे की बस ,
जब भी किसी बच्चे को देखता ,
अन्दर का दर्द पिघलने लगता ,
उनकी माँए मुझे शक की नजर से देखती ,
एक दोस्त ने सलाह दी ,एक बच्चा अपना लो ,
वो तुम्हारा अपना होगा ,
एक शर्त लोग रखते ,बच्चा उसीको मिलेगा ,
जो पत्नी वाला होगा ,
इस उम्र में ,कौन पति मानेगा ,
लगा यह जन्म बे - औलाद गुजरेगा ,
पी कर ,देर रात लौट रहा था ,
सुनसान सड़क अपनी मस्ती में सो रही थी ,
मैं ......सिर्फ़ जाग रहा था ,बच्चे की रोनी की आवाज ,
गुनगुना रही थी , मैं लहरा के सडक पे बैठ गया
मेरी गोद में .......बच्चा खिलखिला के हँस रहा था ,
एक चोर की तरह भाग निकला ,
मेरी गोद में खूब खेलता वो ,
पापा वो कहने लगा ,
अब वो अक्सर माँ को पूछता ..जवाब रोज खोजता ,
माँ की फोटो दिखा कर ,उसकी माँ बताया ,
अब वो मेरी माँ से खूब बातें करता ,
माँ से मेरी शिकायत भी करता ,
......एक दिन वो .....मेरी माँ को ले आया ,
बहुत खूबसूरत .....बिल्कुल मेरी माँ जैसी ,
अब हम तीनों खूब मजे से जीते ,
रोज मैं भगवान से यही मांगता ,
मुझको सौ साल की उम्र दे दे ,
कुछ दिन और अपनी माँ के साथ जी लूँ ,
उसके बच्चों को देख लूँ ,
थोड़ा दादा बन के जी लूँ ,
जब भी किसी बच्चे को देखता ,
अन्दर का दर्द पिघलने लगता ,
उनकी माँए मुझे शक की नजर से देखती ,
एक दोस्त ने सलाह दी ,एक बच्चा अपना लो ,
वो तुम्हारा अपना होगा ,
एक शर्त लोग रखते ,बच्चा उसीको मिलेगा ,
जो पत्नी वाला होगा ,
इस उम्र में ,कौन पति मानेगा ,
लगा यह जन्म बे - औलाद गुजरेगा ,
पी कर ,देर रात लौट रहा था ,
सुनसान सड़क अपनी मस्ती में सो रही थी ,
मैं ......सिर्फ़ जाग रहा था ,बच्चे की रोनी की आवाज ,
गुनगुना रही थी , मैं लहरा के सडक पे बैठ गया
मेरी गोद में .......बच्चा खिलखिला के हँस रहा था ,
एक चोर की तरह भाग निकला ,
मेरी गोद में खूब खेलता वो ,
पापा वो कहने लगा ,
अब वो अक्सर माँ को पूछता ..जवाब रोज खोजता ,
माँ की फोटो दिखा कर ,उसकी माँ बताया ,
अब वो मेरी माँ से खूब बातें करता ,
माँ से मेरी शिकायत भी करता ,
......एक दिन वो .....मेरी माँ को ले आया ,
बहुत खूबसूरत .....बिल्कुल मेरी माँ जैसी ,
अब हम तीनों खूब मजे से जीते ,
रोज मैं भगवान से यही मांगता ,
मुझको सौ साल की उम्र दे दे ,
कुछ दिन और अपनी माँ के साथ जी लूँ ,
उसके बच्चों को देख लूँ ,
थोड़ा दादा बन के जी लूँ ,
सोमवार, अगस्त 10, 2009
एक रास्ता
मन को हल्का करना ,
बहुत सरल ,और सीधा है ,
वैसे मन हर पल ,
मकडी के जाले की तरह ,
कुछ न कुछ बुनता रहता ,
और हम उसमें फंसते जाते ,
मन भारी होने लगता, अशांत हो कर ,
वगैर बात के ,गुस्सा करता ,
जब भी इस ,भवंर में फंस जाओ ,
आखें बंद कर के ऐसे सोचो ,
अपना सब कुछ दुसरोंको दे -दो ,
तुम्हारा कुछ नही है ,इस दुनिया में ,
हम सभी को सब छोड़ के जाना होगा ,
अपना कुछ नही ,
लाल किला ,ताजमहल सब यहीं है ,
मुगलों का राज्य पूरे हिदुस्तान में फैला था ,
अब कहाँ मुग़ल ? कहाँ उनका परिवार ...?
सब खो गया ....बस इतिहास के पन्नों में दर्ज है ,
ऐसा सोच के देखो ,सच कहता हूँ ,
खून का दौडा शांत हो जायेगा ,
मन खुश हो के ,महकने लगेगा ,
इस सुझाव को मान लो ,
अपने को ,अपने ही जाल में ,फंसने से निकाल लो ,
बहुत सरल ,और सीधा है ,
वैसे मन हर पल ,
मकडी के जाले की तरह ,
कुछ न कुछ बुनता रहता ,
और हम उसमें फंसते जाते ,
मन भारी होने लगता, अशांत हो कर ,
वगैर बात के ,गुस्सा करता ,
जब भी इस ,भवंर में फंस जाओ ,
आखें बंद कर के ऐसे सोचो ,
अपना सब कुछ दुसरोंको दे -दो ,
तुम्हारा कुछ नही है ,इस दुनिया में ,
हम सभी को सब छोड़ के जाना होगा ,
अपना कुछ नही ,
लाल किला ,ताजमहल सब यहीं है ,
मुगलों का राज्य पूरे हिदुस्तान में फैला था ,
अब कहाँ मुग़ल ? कहाँ उनका परिवार ...?
सब खो गया ....बस इतिहास के पन्नों में दर्ज है ,
ऐसा सोच के देखो ,सच कहता हूँ ,
खून का दौडा शांत हो जायेगा ,
मन खुश हो के ,महकने लगेगा ,
इस सुझाव को मान लो ,
अपने को ,अपने ही जाल में ,फंसने से निकाल लो ,
बुधवार, जुलाई 29, 2009
बरसात
पहले हर बरसात में भीगता था ,
जब से अमीर हुआ ,
बरसात में भीगने का एहसास भूल गया ,
कार में बैठ के ,बरसात देखता ,
ड्राईवर मेरा छतरी लिए खडा रहता ,
भीगना गरीबी की निशानी है ....?
समझ गया मैं ,क्यों नहीं पैसे वाले भीगते ---?
अब गरीब होना चाहता ,पर हो नही सकता ,
घर वाले होने नहीं देगें ,
अब रास्ता एक है ........,
सब छोड़ कर भाग जाओ कहीं ,
पहचान न पाए कोई ,
भीख मांग कर गुजारा करना ,
नोकरी भूल कर मत करना ,
सच कहता हूँ ...........,
भीगने का बडा मज़ा आएगा ,
भिक्छुक बन कर जीना जैसे ........बुद्ध जिए थे ,
जब से अमीर हुआ ,
बरसात में भीगने का एहसास भूल गया ,
कार में बैठ के ,बरसात देखता ,
ड्राईवर मेरा छतरी लिए खडा रहता ,
भीगना गरीबी की निशानी है ....?
समझ गया मैं ,क्यों नहीं पैसे वाले भीगते ---?
अब गरीब होना चाहता ,पर हो नही सकता ,
घर वाले होने नहीं देगें ,
अब रास्ता एक है ........,
सब छोड़ कर भाग जाओ कहीं ,
पहचान न पाए कोई ,
भीख मांग कर गुजारा करना ,
नोकरी भूल कर मत करना ,
सच कहता हूँ ...........,
भीगने का बडा मज़ा आएगा ,
भिक्छुक बन कर जीना जैसे ........बुद्ध जिए थे ,
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