मंगलवार, जून 09, 2009

महेंदी

आखों पे हाथ रख के ,पूछते है
नाम बताओं ,मै कौन हूँ ?
महेंदी की महक ,उनकी हथेली की ,
पहचान कर .......,
नाम बताने में आनाकानी करने लगा ,
खीज कर वो ...........
कहने लगी , कमाल करते हो ,
मेरी हथेली को भी पहचान नही पाते,
कुछ नाराज सी ........,
तुनक कर दूर बैठ गयी ,
मुश्किल मेरी हो गई ,अब क्या कहूँ उनसे ,
मै तो उनके साये तक को ,पहचान लेता हूँ ,
परछइओं की भीड़ में ...........,

2 टिप्‍पणियां:

Mired Mirage ने कहा…

वाह, यह परछाइयों की भीड़ में साये को पहचानने वाली बात बहुत भली लगी।
घुघूती बासूती

भंगार ने कहा…

bahut bahut shukrya