बुधवार, नवंबर 18, 2009

९१ कोजी होम

ग़ालिब सीरियल की शूटिंग के दौरान कभी -कभी कुछ घटनाये इस तरहं की हो जाती थी
जिनकों आज तक भूल नही पाया .......रात को शूटिंग चल रही थी ....करीब दो बजे थे ,गुलज़ार साहब
को किसी एक खास सीन के लिए .....लालटेन की जरूरत थी ....अब दो बजे रात को लालटेन कहाँ से
मिले .....बम्बई जैसे शहर में लालटेन मिलना .....मैं यूनिट में हर किसी से पूछने लगा ....किसी के घर में
लालटेन है ? ........पर सब न में जवाब दिया ....मैंने सोचा गुलज़ार साहब से कह ही देता हूँ .....लालटेन नहीं
मिल रही है ....तभी एक लडका जो ...हम सभी को पानी -और चाय पिलाता था ...मुझ से कहने लगा .....मैं दस
मिनट में ले कर आता हूँ .....और सच में ही ...दस मिनट में लालटेन ले कर आ गया ....मैं सीधा गुलज़ार साहब के पास गया ....उन्हें लालटेन दी ...शूटिंग पूरी हुई .....हम सभी उस लडके को भूल ही गए ......सभी लोग जा चुके थे
सेट पर मैं और मेराज साहब थे ....और वो लालटेन लेन वाला लडका था ....मैंने उससे पूछा ...यह लालटेन कहाँ से
ले कर आया .....? उसने बताया अम्बोली नाके पे जो चर्च है .....वहां एक पागल बैठता है मैंने उसके पास लालटेन देखी थी ....और सोचा उससे मांग कर ले आता हूँ ......जब मैं उसके पास पहुँचा तो उसने पहले देने से इन्कार
कर दिया ....फ़िर मैंने उसे बताया .....ग़ालिब सीरियल की शूटिंग चल रही है ......और फ़िर जो उसने कहा ...जैसे
वो गुलज़ार साहब को और ग़ालिब को बहुत अच्छी तरहं जानता है .....एक बीस रूपये दे दीजिये उसे दे दूंगा ...
ग़ालिब सीर्यिअल रिलीज होने से पहले ..हमारे निर्माता पे केस कर दिया ....वैसे यह केश
गुलज़ार साहब पे किया था ...सिर्यिअल उन्ही के नाम से पास था ....दिल्ली के कोर्ट में चल रहा था .....और किसी
पेपर गुलज़ार साहब के सिग्नेचर लेना था .....पर गुलज़ार साहब जैसलमेर ...में लेकिन फ़िल्म की शूटिंग कर रहे थे .....मैं बच्चों के साथ दिल्ली आया था ....जय सिंह से मुलाकात हुई कहने लगे ......आप को जैसलमेर जाना
होगा ....और वह भी आज रात को ...परसों कोर्ट में मुकदमे की डेट है .....मतलब कार से जाना होगा और कल
किसी वक्त जैसलमेर पहुंचना होगा .....और गुलज़ार साहब से साइन ले कर तुरंत वापस चल देना होगा .......
मैं दो ड्राइवर के साथ मारुती कार ले कर रात आठ बजे निकल गया बच्चों को राजेंद्र सिंह
के घर छोड़ कर चल दिया .....पूरी रात चलता रहा ..........सुबह बीकानेर पहुँचा ..एक होटल में रूम लिया ............

3 टिप्‍पणियां:

नीरज गोस्वामी ने कहा…

आपके किस्से पढ़ कर लगता है ये फ़िल्मी और ग्लेमर की दुनिया कितनी अजीब और तकलीफों भरी है...ना दिन को आराम ना रातों को चैन...आप बहुत अच्छे से किस्से बता रहे हैं...बताते रहिये...
नीरज

अर्शिया ने कहा…

रोचक एवं ज्ञानवर्द्धक संस्मरण।
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11वाँ राष्ट्रीय विज्ञान कथा सम्मेलन।
गूगल की बेवफाई की कोई तो वजह होगी?

अजय कुमार ने कहा…

रोचक है लेकिन आपने रेगिस्तान का सफ़र ऊंट से
क्यों नही किया
हा हा हा हा