शुक्रवार, फ़रवरी 10, 2012

चंद्रमुखी ( ५)

रात भर जगा हुआ था ,बार -बार आँख बंद हो रही थी , अब
खामोशी छा गयी थी ......हम में ............. ।
पत्नी मुझे जगा रही थी ......आप सो गये क्या .......? हूँ ,क्या हुआ
टैक्सी रुकी हुई थी ...मैंने पूछा .......यह टैक्सी खड़ी क्यों है .....बाहर
देखा तो हम वापस फिर से मनाली आ गये हैं ..........पहले तो मैं डर गया
मैंने पत्नी की तरफ देखा ......हम वापस क्यों आ गये हैं ?....मेरा घबराया
चेहरा देख के पत्नी ने पूछ ....क्या हुआ ?

मैं गुस्से में आ गया .....मुझे उठाया क्यों नहीं ,आप जबरदस्त नीद
ले रहे थे मुझे उठाना ठीक नहीं लगा ........सुबह जल्दी -जल्दी में मेरा
मंगलसूत्र ,बाथ रूम में छुट गया था ....उसे लेना था ...........
मैंने आप से कहा पहले तो नहीं फंसा था ...अब बेटा जेल जावो ........मैंने नीलू से कहा
तुम चली जाओ ,मैं यहीं बैठा हूँ ..........
पत्नी बोल पड़ी ,आप भी चलिए ना .......मैंने सीधे मना कर दिया .गलती तुमने की है
तुम्ही जाओ ......पत्नी टैक्सी से उतरी और होटल की तरफ चल दी .........
मैं डर के मारे वहीं बैठा रहा .........आधा घंटा हो गया ,पर नीलू नहीं आई .........
अब मुझे डर लगने लगा .......इसी बीच होटल क़ा वेटर आया और मुझे देख के कहने लगा
साहब आप को होटल में बुलाया है ......मैं बहुत डर गया ...हुआ क्या भाईकुछ गड़बड़ हो
गयी ....नहीं साहब ......वह क्या है ....रूम नुम्बर चार वाले साहब की पत्नी रात में कहीं खो गयी
......साहब सो रहे थे .....और रात में उनकी पत्नी पता नहीं कहाँ चली गयी ....

मैं कुछ सोच के ,उस वेटर के साथ चल दिया .......जब होटल में पहुंचा उस आदमी को पहचान लिया
...........यह तो ज़िंदा है ...मुझ जैसा कोई बेवकूफ नहीं है .....मेरी जान में जान आयी ....
और उस आदमी की तरफ मुखातिब हुआ ......और फिकरा कसते हुए कहा आप की पत्नी ही थी
या कोई और ही थी ........गुस्से में वह बोल पड़ा क्या बकवास करते हो ...मेरी पत्नी थी ..........
मैं मैनेजर की तरफ मुडाऔर पूछा क्यों बुलाया हैं .......वह साहब एक कागज पर लिखना पडेगा
आप क़ा समान मिल गया .......
मजाक में कहा इन साहब क़ा समान नहीं मिलेगा .....वह दिल्ली जा चुका है
आप साहब को कैसे मालूम .......यह मत पूछो....तभी मेरी पत्नी आ गयी उसने दिखा के मुझे कहा
मिल गया ......फिर मैनेजर एक कागज दिया .......और कहा हाँ साहब इस पर लिख दें
मैंने कागज़ पे लिख के दे दिया .......उस आदमी को देख के बहुत गुस्सा आ रहा था
कैसे -कैसे लोग हैं ....मन मेरा कह रहा था .....इस साले को दो हाथ जड़ दूँ .....तभी टैक्सी वाला
आ गया साहब अब चलिए बहुत देर हो रही है मुझे वापस भी आना है ..........

मैं अपनी पत्नी के साथ चल दिया .....और शाम तक हम लोग शिमला जा पहुंचे वहाँ हमने एक होटल देखा ........मैं बहुत खुश था ...जेल जाने सो बच गया था ........अब मुझे चद्रमुखी से डर
लगने लगा ....अब सोचने लगा अब वह मुझसे कभी नहीं ना मिले ..............


...........(आगे)

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